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Here you will get nothing..... . योगस्थ: कुरु कर्माणि संग त्यक्तवा धनंजय। सिद्धय-सिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।। (हे अर्जुन! कर्म न करने का आग्रह त्यागकर, यश अपयश के विषय में समबुद्धि होकर योगयुक्त होकर, कर्म कर, समत्व को ही योग कहा जाता है|) ACT
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